What Is Seo in Hindi | SEO क्या है पूरी जानकारी

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आज के इस डिजिटल ज़माने में हर कोई व्यक्ति फेमस होकर ऑनलाइन पैसे कमाना चाहता हे, या अपनी पहचान बनाना चाहता है। क्यूंकि इस डिजिटल ज़माने में जिस व्यक्ति का ऑनलाइन दुनिया में जीतनी लोकप्रियता है। उसके लिए पैसा कमाना उतना ही आसान हो गया है। क्योंकि एक बार ऑनलाइन लोकप्रियता बना ली तो उस व्यक्ति के पास पैसे कमाने के बोहत सारे विकल्प आ जाते है। 

पर क्या आप जानते हो लाखो करोडो लोग अपनी पहचान बनाना चाहते है। पर इतने लाखो करोडो लोग १ ही चीज के पीछे पड गए तो सबको इस चीज में सफलता मिलना असंभव है। इसीलिए जो लोग टॉप पोजीशन पर होते है उन्हें ही सफलता हासिल होती है। 

अगर हम गूगल पर जो लाखो करोडो वेबसाइट हे उनकी बात करे तो सभी चाहते हे के उनकी वेबसाइट गूगल के पहले पेज पर रैंक करे पर ये होना असंभव हे। अगर किसी का रैंक बढ़ेगा तो किसी का रैंक घटेगा भी। पर अगर आप चाहते हो की आप गूगल पर अच्छे पोजीशन पर रैंक करे तो गूगल पर वेब पेजेस को रैंक करने में एक बोहत ही असरदार फैक्टर हे जिसे फॉलो करके आप आपके वेबसाइट के रैंकिंग में बोहत ही सुधारना ला सकते हो। 

तो उस सबसे असरदार फैक्टर का नाम है SEO (Search Engine Optimization)

जानिये SEO क्या है ?

SEO का फुल फॉर्म Search Engine Optimization है। SEO एक ऐसा प्रोसेस हे जिसे सर्च इंजन के जो नियम होते है उनका पालन करते हुए अच्छे से फॉलो किया जाए तो आपके वेबसाइट के वेब पेजेस गूगल के टॉप पोजीशन पर रैंक करेंगे। और आपके पजेस को टॉप पोजीशन पर रैंक कराने से आपको कोई नहीं रोक सकता। एक बात का ध्यान रखिये SEO वेबसाइट में होने वाले pages का किया जाता है ना की वेबसाइट का। और गूगल या अन्य सर्च इंजन में आपके पेजेस रैंक होते है, आपकी वेबसाइट नहीं। 

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अगर आप अच्छे पोजीशन पर रैंक करना चाहते हो तो आपको आपके वेब पेजेस का SEO करना बोहत ही जरुरी होता है। आप कितना भी अच्छा कंटेंट क्यों ना लिख लो पर उसमे SEO के जो फैक्टर्स होते है, उन्हें डाले बिना आपका कंटेट रैंक करना बोहत ही मुश्किल है। आपको कंटेंट में SEO के क्या फैक्टर्स का ध्यान रखना होता है यह जानने के लिए आगे पढ़ते रहिये।

SEO यह एक Ongoing प्रोसेस है, आपको आपके वेबसाइट के SEO पर हमेशा काम करते ही रहना पड़ता है। आप SEO करना बंद कर दोगे तो इससे आपकी रैंकिंग पर बोहत ही गहरा असर पड़ सकता है।

ये तो हम जान गए SEO करना क्यों महत्वपूर्ण हे पर यह इतना आसान प्रोसेस भी नहीं है जो तुरंत किया जा सके। SEO के कुल ३ प्रकार होते है। और हमें इन तीन्हो SEO के प्रकार का ध्यान रखना होता है।

SEO के ३ महत्वपूर्ण प्रकार

1. On Page SEO

2. Off Page SEO

3. Technical SEO

On Page SEO Kya Hai | On Page SEO In Hindi

जैसे के इसके नाम से पता चलता है On Page SEO यानि किसी भी पेज के ऊपर जो कंटेंट होता है उसे Optimize कीया जाए। On Page SEO में सबसे ज्यादा मेटा डाटा पर फोकस किया जाता है। मेटा डाटा यानि किसी भी पेज का मेटा टाइटल, यूआरएल, और मेटा डिस्क्रिप्शन। चलिए पहले यह जान लेते हे मेटा डाटा कैसा होना चहिए। अगर आप किसी भी चीज़ के बारे में कंटेंट लिख रहे हो तो आपको सबसे ज्यादा keyword पर फोकस करना होता है। जिस टॉपिक पर आप कंटेंट लिखने जा रहे हो उस टॉपिक के ऊपर आपको अच्छे से कीवर्ड रिसर्च करना होता है। क्योंकि जिस चीज के बारे में यूजर सर्च करते होंगे उसी चीज के बारे में कंटेंट लिखा जाए तो बेहतर होगा। अगर आप ऐसी चीज पर कंटेंट लिखते हे जिसके बारे में कोई यूजर सर्च ही नहीं करता तो उस कंटेंट का कोई भी फायदा नहीं होगा। हमेशा कीवर्ड ऐसे ही चुनने होते हे जिसका keyword volume अच्छा हो और keyword difficulty कम हो। keyword volume यानि उस पर्टिकुलर कीवर्ड पर एक महीने में कितने सर्च आते है। और keyword difficulty यानि उस कीवर्ड पर रैंक करना कितना डिफिकल्ट है। आपको ऐसे कीवर्ड्स चुनने हे जिनका keyword volume अच्छा हो और keyword difficulty कम हो इससे आपके वेबसाइट पर ट्रैफिक आने की संभावना बढ़ जाती है। 

Meta Title क्या है :

मेटा टाइटल यानि हमारे पेज पे जो कंटेंट होता हे उस पेज के टाइटल को मेटा टाइटल कहा जाता है। हमे एक बात का बोहत ध्यान रखना होता हे जिस कीवर्ड पर हम कंटेंट लिख रहे हे वह कीवर्ड हमारे टाइटल, यूआरएल, और डिस्क्रिप्शन में होना बोहत ही जरुरी होता है। मेटा टाइटल की ६५ Character की लिमिट होती है, आपका टाइटल ६५ Character से बड़ा नहीं होना चहिए। 

Meta URL क्या है :

URL का फुल फॉर्म Uniform Resource Locator होता है। यूआरएल किसी भी वेबसाइट के लिए उसकी पहचान की तरह काम करता है। किसी भी वेबसाइट को डिफाइन करने के लिए URL का इस्तमाल होता है। 

यूआरएल की लिमिट जीतनी कम होती हे उतना रैंकिंग के लिए अच्छा होता है। अगर आप यूआरएल की length लम्बी रखोगे तो वो सर्च इंजन के रिजल्ट में आने के बाद कट हो जायेगी। आप ५ word से कम length का यूआरएल रखोगे तो वो रैंकिंग के लिए बेहतर होगा। 

Meta Description क्या है :

Meta Description हमारे वेब पेज के लिए बनायीं गयी डिस्क्रिप्शन होती है। मेटा डिस्क्रिप्शन हर एक पेज के लिए अलग होती है। मेटा डिस्क्रिप्शन को seo friendly बनाने के लिए इसमें Targeted Keyword डालना बोहत जरुरी है। हमें मेटा डिस्क्रिप्शन में सिर्फ वही कीवर्ड रखनी होती है जो हमारे कंटेंट में हे और जिसके बारे में कंटेंट लिख रहे है। हम कोई भी ऐसी कीवर्ड नहीं यूज कर सकते जो हमारे कंटेंट से रिलेटेड ना हो। Meta Description की Length १५० से १६० character के बिच होनी चहिए। 

आपने देखा होगा बोहत सारे लोग अपने कंटेंट में इमेजेस डालते है। कंटेंट में इमेज डालना बोहत ही अच्छा होता है पर कंटेंट में आप जो भी इमेज डालोगे वो उस कंटेंट से मिलती झूलती होनी चहिए, और उस इमेज में alt text होना भी बोहत जरुरी होता है। आपको alt text में वह इमेज जिस चीज से रिलेटेड हे उसके बारे में ही लिखना है। और इस बात का आपको बोहत ध्यान रखना हे के उस इमेज की size कम होनी चहिए। ताकि वेबसाइट जब लोड होती है तब ये इमेज लोड होने में ज्यादा टाइम ना ले। इसी तरह से आप अगर आपके कंटेंट में वीडियो डाल रहे हो तो आपको ऐसी ही प्रोसेस फॉलो करनी है। 

Off Page SEO Kya Hai | Off Page SEO In Hindi

Off Page Seo यानि आपको आपके वेबसाइट का SEO करना है तो आपके वेबसाइट में कोई भी चेंजेस नहीं करने है। आपको दूसरी वेबसाइट पर से आपकी वेबसाइट पर ट्रैफिक लाना होता है और दूसरे वेबसाइट से बैकलिंक लेकर आपके वेबसाइट की domain authority बढ़ानी होती है। आपको दूसरी वेबसाइट से जितनी लिंक्स मिलती है इससे ये साबित होता है के आपकी वेबसाइट एक अच्छे अथॉरिटी वाली वेबसाइट हे। आपको backlink सिर्फ ऐसे ही वेबसाइट पर से लेनी हे जिनकी domain authority हमारे वेबसाइट के डोमेन अथॉरिटी से बढ़िया होनी चाहिए। आपको ऐसी वेबसाइट से कभी बैकलिंक नहीं लेनी है जो बिलकुल स्पैम फैला रही है। और ऐसी साइट से कभी backlink ना लीजिये जो आपके वेबसाइट से बिलकुल भी मिलती झूलती ना हो। अगर आप Off Page SEO अच्छे से कर लोगे तो आपकी वेबसाइट गूगल पर अच्छे पोजीशन पर रैंक करेगी। 

ये भी पढ़िए

Technical SEO | What Is Technical SEO In Hindi

जिस तरह On Page Seo और Off Page Seo वेब पेजेस के रैंकिंग के लिए बोहत जरुरी है उसी तरह Technical SEO भी वेब पेजेस के रैंकिंग के लिए बोहत ही जरुरी है। Technical seo में वेबसाइट के तकनिकी चीजों पर फोकस किया जाता है। अगर आपअपनी वेबसाइट का Technical seo अच्छे से करना चाहते हो तो निचे दी गयी चीजों पर आपको फोकस करना होता है। 

SSL: इसका फुल फॉर्म Secure Socket Layer होता है। ये हमारी वेबसाइट secure हे या नहीं ये बताता है। हमारी वेबसाइट हमेशा secure होनी चहिये। क्युकी गूगल जो वेबसाइट secure होती हे उन्हें ही जल्दी रैंक करवाता है। http: से स्टार्ट होती है तो आपकी वेबसाइट सिक्योर नहीं हे पर अगर आपकी वेबसाइट https: से स्टार्ट होती है तो आपकी वेबसाइट secure है। 

Website Speed : आपके वेबसाइट के स्पीड का आपके वेब पेजेस के रैंकिंग में बोहत असर पड़ता है। आपके वेबसाइट की स्पीड जीतनी तेज होती है। उतने ही ज्यादा आपके सर्च इंजन में रैंक होने के चान्सेस होते है। अगर आपके वेबसाइट की स्पीड कम होगी तो आपके वेबसाइट का bounce rate बढ़ जाता है। और bounce rate बढ़ने से आपकी रँकिंग भी ख़राब होने लगती है। 

User Interface (UI) : user interface यानि जब कोई यूजर आपकी वेबसाइट पर आता है तब उसे आपकी वेबसाइट कैसे दिखती है। किसी भी यूजर के लिए कोई भी वेबसाइट ओपन होने के बाद सिंपल और रेस्पॉन्सिव दिखनी चहिए। अगर कोई यूजर आपके साइट पर आता हे और उसे कोई भी कंटेंट दिखने में दिक्कत हो रही है तो इससे आपके वेबसाइट का बाउंस रेट बढ़ जाता है और वेबसाइट की रैंकिंग ख़राब होने लगती है। 
Robots.txt file: Robots.txt के यूज से किसी भी पेज को गूगल में crawl और index होने से रोकने के लिए होता है। आपके वेबसाइट में कुछ ऐसे पेजेस होते हे जिन्हे आप गूगल में रैंक नहीं करना चाहते होंगे तो जिस पेज को आप गूगल में index नहीं कराना चाहते उस url को robots.txt फाइल में डालना होता है इससे वो पेज index नहीं होता।

Sitemap: साइटमैप २ प्रकार के होते है १. html साइटमैप २. xml साइटमैप

१. html sitemap : html साइटमैप एक तरह का html पेज होता है जिसमे वेबसाइट के ऊपर जितने भी वेबपेजेस होते हे उनकी लिस्ट डाली जाती है। ऐसा करने से यूजर को लिंक मिलने में आसान हो जाता है। और साथ ही html sitemap होने के वजह से वेबसाइट के पेजेस गूगल पर जल्दी इंडेक्स हो जाते है।

२. xml sitemap : ये एक xml फाइल होती है जो वेबसाइट के backend में होती है। जैसे ही कोई भी पोस्ट या पेज वेबसाइट में डाला जाता है, तब उसकी लिंक xml साइटमैप के फाइल में स्टोर हो जाती है। अगर हमें अपने पेजेस जल्दी से इंडेक्स कराने होंगे तो, xml साइटमैप सबमिट करके इस प्रोसेस को जल्दी से करवाया जा सकता है।

उम्मीद करता हुआ आपको SEO kya hai ये पता चल गया होगा। इस पोस्ट में हमने SEO के बारे में सिर्फ बेसिक जानकारी बताई है। अगर आप SEO से संबधित और पोस्ट्स देखना चाहते हो तो कमेंट करके बताइये हम जल्द ही वो पोस्ट लेकर आ जायेंगे।

Akash

में पिछले २ सालो से Search Engine Optimization (SEO) का जॉब कर रहा हूँ। और साथ ही में पार्ट टाइम WordPress Development और ब्लॉग्गिंग भी करता हूँ।

This Post Has 2 Comments

  1. Rishabh Sharma

    Badhiya content he. Sir seo ke baare me please aur posts daliye

  2. Akash

    haa jarur dalenge bohat hi jaldi SEO ke baare me bohat badhiya posts aane wali hai

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