Technical Seo Kya Hai | What Is Technical Seo in Hindi

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नमस्कार दोस्तों आपका फिरसे एक बार स्वागत है हमारे इस नए लेख में। आज के इस लेख में हम Technical SEO Kya Hai इसके बारे में विस्तार में जानने वाले है। अगर आप Technical SEO Kya Hai यह जानकारी लेना चाहते हो तो आपको इस लेख में अंत तक बने रहना होगा। अगर आप अंत तक बने रहेंगे तभ ही आप Technical SEO Ke Bare Me Puri Jankari ले पाओगे।  

Technical SEO Kya Hai इस बारे में जानकारी देने से पहले में आपको बताना चाहता हूँ के, अगर आप SEO Kya Hota Hai, On Page SEO Kya Hai, और Off Page SEO Kya Hai यह जानकारी लेना चाहते हो तो इन सभी के बारे में हमारे इस ब्लॉग में बोहत अच्छे से जानकारी दी गयी है। तो आप इसके बारे में भी अच्छे से पढ़ सखते हो। 

दोस्तों अख्सर होता यह है की बोहत सारे लोग हमेशा On Page SEO पर फोकस करते है। उन्हें लगता है अगर वह On Page SEO करले तो उनकी रैंकिंग सुधर जायेगी। On Page SEO करने से आपके रैंकिंग में कुछ सुधारना आ सकती है। पर जिस तरह On Page करना SEO  लिए असरदार साबित होता है बिलकुल उसी ही तरह आपको Off Page SEO, और Technical SEO पर भी ध्यान देना होता है। अगर आप On Page, Off Page और Technical SEO इन तीन्हो चीजों पर अच्छे से ध्यान दोगे तो आपको अच्छी रैंकिंग मिलने से कोई नहीं रोक सकता।  

तो चलिए बिना देरी किये लौटते है हमारे टॉपिक के तरफ और जानते है Technical SEO Kya Hai और Technical SEO Ke Bare Me Puri Jankari.

Technical SEO Kya Hai

जिस तरह On Page और Off Page यह दोनों SEO के बोहत ही महत्वपूर्ण फ़ैक्टर है, उसी तरह Technical SEO भी बोहत ही महत्वपूर्ण फ़ैक्टर है। हमें इसके नाम से ह पता चल जाता है Technical SEO यानि इसमें तकनिकी चीजों के बारे में कुछ होगा। 

Technical SEO यह एक ऐसा फैक्टर है जिसके ऊपर आपको शुरुवात से है काम करना पड़ता है। जैसे ही आप डोमेन और होस्टिंग खरीदते है, तब से आपको तकनीकी चीजों पर ध्यान देना पड़ता है। 

Technical SEO में आपको अपनी वेबसाइट के Structure के ऊपर अच्छे से ध्यान देना होता है। आपकी वेबसाइट हमेशा SEO Friendly Website होनी चहिए। यानि आपके वेबसाइट में जो भी कंटेंट है वह यूजर को अच्छे से दिखाई देना चाहिए। जब कभी यूजर आपकी वेबसाइट पर आता है तब वह किसी चीज के बारे में सोच कर आता है। अगर वेबसाइट के ऊपर आने के बाद वह जिस चीज के लिए आया था उसे उसके अलावा दूसरा ही कुछ दिखाई देगा तो वह ज्यादा देर तक आपके साइट पर नहीं रूकेगा। और इससे आपके रैंकिंग के ऊपर असर पड़ेगा। 

इसके बाद आपको आपके वेबसाइट की स्पीड को भी अच्छे से optimize करना होगा। ताकि जब कभी कोई यूजर आपके साइट पर आये तब आपकी वेबसाइट जल्दी से जल्दी ओपन होनी चाहिए। अगर यूजर आपके साइट पर आता है, और वह पेज लोड होने में ही बोहत टाइम ले रहा है, तो इससे वह यूजर तुरंत भाग जाएगा और इसका आपको बोहत बड़ा नुक्सान होगा।   

Technical SEO में वैसे तो बोहत सारी चीजे आती है जैसे कई Crawling, Indexing, Sitemap Submission, Robots.txt और बोहत कुछ, यह सारि चीजे हम इस ही आर्टिकल में कवर करेंगे पर इसके पहले हम जान लेते है Technical SEO Kyu Jaruri Hai 

Technical SEO Kyu Jaruri Hai

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जिस तरह जब आप बाइक चलाने जाते है, तब उसमे पेट्रोल की जरुरत होती है उसी तरह किसी भी वेबसाइट को रैंक कराने के लिए On Page, Off Page और Technical SEO की जरुरत होती है। आप बिना SEO किये आपके वेबसाइट को रैंक नहीं करा सकते। और बिना Technical SEO किये आपका SEO process पूरा नहीं होता। कुछ सालो पहले लोग कंटेंट में जबरदस्ती कीवर्ड भर के अपने वेब पेज को रैंक करा देते थे। पर अब वैसा बिलकुल भी नहीं, अगर वेबसाइट रैंक करनी है तो Technical SEO भी कराना ही पड़ेगा। 

गूगल सिर्फ ऐसे ही वेबसाइट को रैंक करता है जिसका कंटेंट अच्छा हो और साथ ही उसका SEO भी अच्छा हो। यह बात तो सभी को पता चल गयी है इसीलिए आजकल हर कोई ब्लॉगर या बिज़नेस अपनी वेबसाइट के SEO पर बोहत ध्यान देता है। ऐसे में अगर आप SEO नहीं करेंगे तो इससे यह साफ़ हो जाता है की आपके वेब पजेस रैंक होना बिलकुल ना के बराबर ही है। इसीलिए जब भी SEO करने के बात आती है, तब उसमे Technical SEO करना उतना  ही जरुरी है जितना On Page और Off Page SEO करना है। 

हमने यह सब तो जान लिया Technical SEO Kya Hai, Technical SEO Kyu Jaruri Hai अब हम जानेगे Technical SEO Ke Factors जिससे हमें वेबसाइट रैंक कराने में बोहत मदत मिलेगी। 

15 Technical SEO Factors In Hindi

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1. Domain Name – Domain Name Kya Hai

जब कभी हम गूगल पर आते है तब कुछ न कुछ सर्च करने ही आते है। गूगल पर अपना सवाल डालने के बाद गूगल उस सवाल के जवाब लेकर आता है। तब आपने नोटिस किया होगा, जितने भी रिजल्ट आते है उनके साथ एक वेबसाइट का एड्रेस भी होता है, उदहारण : अगर हम सर्च करते है Buy Shoes Online तब हमारे सामने flipkart.com, amazon.com, aur myntra.com ऐसी कुछ वेबसाइट आ जाती है। इन वेबसाइट का ये जो भी नाम होता है इसे ही Domain Name कहा जाता है।

आपने हमेशा देखा होगा Domain Name कभी भी डुप्लीकेट नहीं होता यह एक तरह की id की तरह काम करता है। कही बार आपने यह भी देखा होगा की Domain Name कुछ इस तरह का है amazon.com, amazon.in यह दोनों डोमेन बिलकुल ही अलग हैक्योंकि एक में। .com है तो एक में .in है। ऐसे .com, .in, .net को Top Level Domain(TLD) कहा जाता है।

आपको हमेशा आपके बिज़नेस के हिसाब से ही Domain Name चुनना होगा। अगर आपका clothing का बिज़नेस है तो आपको clothing से मिलता झूलता डोमेन ही खरीदना होगा। ताकि जब भी कोई यूजर आपके वेबसाइट पर आये तो उसे पता चल जाना चाहिए की वह बिलकुल सही जगह पर आया है। आपका जो भी Domain Name होगा वह आसानी से समझ में आना चाहिए। ताकि जब भी कोई यूजर आपकी वेबसाइट पर आता है तो उसे वह नाम तुरंत याद हो जाए। इससे उस यूजर के आपकी वेबसाइट पर दुबारा से आने की संभावना बढ़ जाती है। आपके डोमेन का नाम जितना छोटा और सिंपल होगा उतना SEO के हिसाब से आपके लिए अच्छा है।

2. Web Hosting – Web Hosting Kya Hai

Web Hosting यह एक ऐसी सेवा होती है जो आपको आपकी वेबसाइट या वेब एप्लीकेशन को इंटरनेट पर सभी यूजर के लिए प्रस्तुत करने के लिए मदत कराती है। इसके लिए आपको किसी एक कंपनी की होस्टिंग खरीदनी पड़ेगी। होस्टिंग खरीदने पर आपको उस होस्टिंग सर्विस के Server में rent पर कुछ जगह मिलेगी जिसमे आप आपके वेबसाइट का डाटा स्टोर कर सकते है। जैसे की आप आपके वेबसाइट में जो कुछ Videos, Theme, Images, Content. यह सारी चीजे स्टोर कर सकते हो।

आप जिस भी कंपनी के होस्टिंग खरीद रहे हो, वह एक अच्छी कंपनी होनी चाहिए ताकि आपकी वेबसाइट यूजर के लिए हमेशा लाइवरहनी चहिए। आपको सस्ती होस्टिंग के लिए सिर्फ तब जाना चाहिए जब आपकी वेबसाइट पुरे तरीके से नयी हो, और आपके वेबसाइट पर बोहत कम कंटेंट हो। क्योंकि होस्टिंग कंपनिया आपके प्राइस के मुताबित आपको सर्वर पर space देती है। अगर आपके वेबसाइट में बोहत सारा कंटेंट होगा और आपने एकदम सस्ते वाली होस्टिंग खरीदी है जिसमे आपको बोहत काम सर्वर स्पेस मिलता हो, तो इससे आपकी वेबसाइट ओपन होने में बोहत टाइम लेगी। इससे कोई भी यूजर आपके वेबसाइट पर आते ही भाग जाएगा। या फिर अगर आपके वेबसाइट पर बोहत कम कंटेंट हे और आपने बोहत ही महंगी होस्टिंग खरीद ली जिसमे आपको सर्वर पर बोहत सारा space मिल रहा है तो इससे आपका वह स्पेस waste हो जाएगा इसीलिए हमेशा होस्टिंग अपने जरुरत के मुताबित ही खरीदनी चाहिए।

3. Server location – Server location Kya Hai

Server Location भी एक बोहत बढ़ा रैंकिंग फैक्टर है। मान लीजिये अगर एक कोई हिंदी ब्लॉग साइट है बिलकुल digitips.in तरह तो digitips.in पूरा कंटेंट हिंदी में ही आता है। और जितने भी यूजर इस ब्लॉग पर आते है वो ज्यादातर तो India से ही होते है। क्युकी हिंदी भाषा सबसे ज्यादा India में बोली जाती है इसीलिए यूजर भी हिंदी कंटेंट के लिए गूगल या अन्य सर्च इंजन पर इसके बारे में सर्च करते है। और भी कुछ देश है जहा पर लोग हिंदी में सर्च करते है। पर हमें हमेशा यह देखना चाहिए जिस niche पर हम लोग ब्लॉग्गिंग कर रहे है उसके टार्गेटेड audience कहा के है। जिस देश के टारगेट ऑडियंस होंगे उसी देश का सर्वर लोकेशन रहेगा तो यह एकदम best चीज हो गयी। क्युकी जिस लोकेशन का सर्वर हे उसके बगल के एरिया में वेबसाइट बोहत तेजी से खुलेगी। तो इससे हमारे maximum users की प्रॉब्लम Solve हो जायेगी।

इसके अलावा आपके पास एक और ऑप्शन है। CDN का यानि content delivery network (CDN) CDN से आपके वेबसाइट की कॉपी हर एक सर्वर पर स्टोर हो जाती है। जिससे हर एक Country में आपकी वेबसाइट तेजी से खुलने लग जाती है। CDN Kya Hai इसके बारे में हम आगे चल कर जानेंगे।

4. SSL – SSL Kya Hai 

सबसे पहले हम जान लेते है SSL का पूरा नाम क्या होता है ? SSL यानि (Secure Socket Layer) होता है। SSL किसी भी वेबसाइट को सुरक्षा (Security) प्रदान करता है। SSL यह एक तरह का Certificate होता है, जिससे यह साबित होता है की आपकी वेबसाइट किसी भी यूजर के लिए सुरक्षित है या नहीं। अगर आपकी वेबसाइट पर SSL Certificate है तो कोई भी यूजर आपके वेबसाइट पर बेपरवाह वक्त बिताएगा। पर अगर आपकी वेबसाइट पर SSL Certificate नहीं है तो उसे आपके URL के बगल में Not Secure ऐसे दिखाई देगा और वह यूजर तुरंत है आपकी साइट छोड़ कर भाग जाएगा।

5. Page Speed – Page Speed Kya Hai

Page Speed यानि आप की वेबसाइट ओपन होने में कितना वक्त ले रही है। अगर आप चाहते है की आपकी वेबसाइट गूगल या अन्य सर्च इंजन पर अच्छे से रैंक करे तो आपको अपनी वेबसाइट के वेबपेजेस की स्पीड बढ़ानी होगी। ताकि कोई भी यूजर जब आपकी साइट ओपन करता है और अगर वेब पजेस जल्दी से ओपन नहीं हो रहे तो इससे वह यूजर तुरंत ही आपकी वेबसाइट से भाग जाएगा। इससे गूगल को यह पता चलेगा की यूज़र साइट पर आ तो रहे हे पर यूजर जिस चीज के लिए आरहे है उन्हें वह चीज मिल नहीं रहि है। और इसीलिए गूगल आपकी रैंकिंग घटा देगा। अगर आपकी वेबसाइट किसी एक कीवर्ड के लिए २ नंबर की पोजीशन पर रैंक कर रही है। और जैसे ही कोई यूजर आपकी साइट ओपन करेगा तो उसे तुरंत ही वह कंटेंट दिखाई दिन चाहिए जिसके लिए उसने आपकी url पर क्लिक किया था। अगर वह यूजर तुरंत भाग गया तो फिर वह ३ पोजीशन वाली वेबसाइट पर चला जाएगा। और बाकि के यूजर भी ऐसे ही करेंगे। इससे गूगल ३ पोजीशन वाली वेबसाइट को आपका स्थान देगा और आपका स्थान धीरे धीरे निचे ही चलता जाएगा।

6. Website Structure – Website Structure Kya Hai

Website Structure यानि आपने आपकी वेबसाइट में कंटेंट को किस तरह से प्रस्तुत किया है। अगर कोई यूजर आपकी वेबसाइट पर आता है तो उसके पीछे उसका कुछ न कुछ हेतु होता है। अगर कोई यूजर आपकी साइट पर आ रहा है तो उसे आसानी से कंटेंट मिल जाना चहिये। आपको इस तरह से आपकी वेबसाइट का structure रखना चाहिए जिससे कोई भी यूजर ज्यादा से ज्यादा समय आपकी साइट पर बिताये। और इसीके साथ गूगल के crawler को भी आपका कंटेंट crawl करने में आसानी होनी चहिए। जिससे आपका कंटेंट जल्द से जल्द index हो जाएगा, और आपके वेबसाइट की ट्रैफिक बढ़ेगी।

7. Mobile Friendly Website – Mobile Friendly Website Kya Hai

अगर आप कोई वेबसाइट बना रहे हो तो वह नाही सिर्फ डेस्कटॉप में अच्छी दिखनी चहिए। तो वह मोबाइल में भी अच्छी दिखनी चाहिए। आपकी वेबसाइट मोबाइल में क्यों अच्छी दिखनी चहिए इसका मुख्य कारन यही हे की, डेस्कटॉप से ज्यादा यूजर आपको मोबाइल के देखने मिलेंगे। अच्छी दिखने के साथ आपकी वेबसाइट responisive भी होनी चहिए। यानि अगर आपके वेबसाइट में कोई feature डाला गया है तो वह feature सभी डिवाइस में काम करना चहिए।

बढ़ते मोबाइल यूजर की संख्या को ध्यान में रखते हुए आपको हमेशा इस चीज का ध्यान रखना होगा की आपकी वेबसाइट मोबाइल डिवाइस में किस तरह से दिखाई दे रही है। और जितने हो सके उतने अच्छे features मोबाइल डिवाइस के लिए उपलब्ध होने चहिए। इससे आप आपके कॉम्पिटिटर से भी अच्छी क्वालिटी पेश कर सकते है। जिससे कोई भी यूजर दुबारा आपके वेबसाइट पर आने के लिए सोचेगा। और आपकी वेबसाइट का यूजर एक्सपेरिएंस बढ़ेगा। अगर आप चेक करना चाहते हे आपकी वेबसाइट मोबाइल फ्रेंडली है या नहीं तो आप इस साइट पर जाकर चेक कर सकते है –> https://search.google.com/test/mobile-friendly

8. Duplicate Content – Duplicate Content Kya Hai

Duplicate Content यानि यह ऐसा कंटेंट होता है जो आपको गूगल या अन्य सर्च इंजन पर पहिले से ही देखने मिल जाएगा। या फिर यह ऐसा कंटेंट होता है जो पहिले से ही आपकी वेबसाइट पर मौजूद होता है। आपका इस बात का हमेशा ध्यान रखना होगा के आप जो भी कंटेंट बना रहे हो क्या वह पहिले से किसी ने बनाया है क्या। आप बोहत सारी ऑनलाइन tools है जिसकी मदत से डुप्लीकेट कंटेंट चेक कर सकते हो। अगर आपका कंटेंट डुप्लीकेट होगा तो गूगल कही बार आपका कंटेंट index भी नहीं करेगा। इसीलिए आपको हमेशा यूनिक कंटेंट ही बनाना चहिये। और अगर आपका कंटेंट बिलकुल यूनिक है तो वह बोहत जल्दी रैंक करने लग जाता है।

9. Xml Sitemap – Xml Sitemap Kya Hai

Sitemap यह एक XML फाइल होती होती है। जिसमे हमारे वेबसाइट पर जितना भी कंटेंट है उन सभी कंटेंट के पेजेस के URL होते है। XML Sitemap के मदत से वेबसाइट के पेजेस को इंडेक्स करना आसान हो जाता है। किसी भी सर्च इंजन का क्रॉलर जब हमारे साइट पर आता है तब उसे यह सभी यूआरएल XML Sitemap के जरिये बोहत ही आसानी से मिल जाता है। और जितने जल्दी आपका कंटेंट क्रॉल और इंडेक्स हो जाए, उतने ही जल्दी आपके वेबसाइट की ट्रैफिक बढ़ने लग जाती है।

10. Url Structure – Url Structure Kya Hai

URL का पूरा नाम (Uniform Resource Locator ) होता है। जिस तरह हमारी पहचान दिखाने के लिए प्रूफ के लिए हमारे पास तरह तरह के id cards होते है। बिलकुल उसी तरह किसी भी वेबसाइट को अपनी पहचान दिखाने के लिए यह यूआरएल होती है। आपकी वेबसाइट को जो भी यूआरएल होता है वह हमेशा सिंपल होना चाहिए। सबसे पहली बात करे तो आपकी यूआरएल हमेशा Https: से स्टार्ट होनी चहिए। इससे यह मालूम पड़ता है की आपकी वेबसाइट बिलकुल सुरक्षित है। उसके बाद आप www भी रख सकते है या बिना www भी रख सकते है। इससे आपको इतना फरक नहीं पड़ेगा। इसके बाद आपके डोमेन को जो भी नाम रहेगा वह आएगा और बादमे। .in, .com, या फिर .net इन में से कुछ भी। इसके बाद आपको आपके यूआरएल में क्या रखना है वह बिलकुल आपके हाट में होता है। आपका वेबपेज जिस चीज के बारे में है वह आपके यूआरएल से ही पता चल जाना चहिये। यूआरएल हमेशा शार्ट और सिंपल होनी चहिए।

11. Broken Links – Broken Links Kya Hai

यह ऐसे लिंक्स होते है, जो किसी न आपको अपनी वेबसाइट में दी थी या फिर आपने किसी को आपकी वेबसाइट पर लिंक दी थी पर जिस पेज के लिए आपको लिंक मिली थी या अपनी दी थी वह पेज अब मौजूद नहीं है। मान लो हमने किसी एक वेबसाइट को हमारी वेबसाइट पर से लिंक दी पर किसी करने के चलते वह पेज उस वेबसाइट से हटवाया गया है। तो जब कोई भी उस लिंक पर क्लिक करेगा तो उसे 404 पेज मिलेगा। यानि जो भी लिंक यही वह ब्रोकन हो गयी है।

12. Crawling Indexing – Crawling Indexing Kya Hai

Crawler यानी यह गूगल या अन्य सर्च इंजन का ऐसा प्रोग्राम होता है जो किसी भी वेबसाइट के वेबपेजेस को crawl करता है। crawler को spider भी कहा जाता है। Crawler किसी भी वेबपेजेस को crawl करने के बाद उन्हें indexer में स्टोर करते है।

13. Amp  – Amp Kya Hai

AMP का फुल फॉर्म Accelerated Mobile Pages होता है। यह गूगल का ही एक open source project है। AMP Version का इस्तमाल करने से आपके वेबसाइट का और एक Version बन जाता है। जो Mobile Devices के लिए बनाया गया है। अगर आपके वेबसाइट का AMP Version है तो यह किसी भी मोबाइल devices में झट से खुल जाता है। इसकी स्पीड बोहत ही बढ़िया होती है। अगर आपके वेबसाइट को AMP Version है तो इससे आपके वेबसाइट पर ट्रैफिक भी बढ़ने लग जाता है।

14. Structured Data – Structured Data Kya Hai

Structured Data यह एक ऐसा तरीका है। जिसकी मदत से हम सर्च इंजन को आसान भाषा में समजा सकते है, के हमारा कंटेंट किस बारे में है। अगर हम हमारे कंटेंट जे बारे में सर्च इंजन को आसान भाषा में समझाने जाये तो हमें हमारे कंटेंट को उस भाषा में लिखना होगा जो सर्च इंजन समझता है। और सर्च इंजन Schema.org की भाषा समज़ता है। हमारे कंटेंट को Schema.org के भाषा में कन्वर्ट करने के लिए हमें अपनी वेबसाइट में Schema.org का code डालना पड़ता है जिससे सर्च इंजन हमारा कंटेंट आसानी से समज सकता है।

अगर आपने अपनी वेबसाइट में आर्टिकल डालने के लिए कोई ब्लॉग पेज बनाया है तो इसमें हमें Article Schema Markup डालना होगा जिससे सर्च इंजन को आसानी से पता चल जाता है की यह कोई आर्टिकल कंटेंट है।

15. Google Search Console – Google Search Console Kya Hai

Google Search Console यह गूगल दद्वारा दिया गया एक Free Tool है जिसे पहले Google Webmaster के नाम से जाना जाता था। आज भी कही सारे लोग इसे Google Webmaster ही कहते है। यह एक ऐसा टूल हे जिसमे तो सबसे पहले अपनी वेबसाइट को सबमिट करना पड़ता है। यानी इस टूल में हमें हमारी website property ऐड करनी होती है। हमें इस Google Search Console के टूल में हमारे वेबसाइट के बारे में बोहत साड़ी जानकारी मिल जाती है। जैसे की हमारे कितने कंटेंट google के bots ने crawl और index किये है। किस कीवर्ड पर हमारा कौनसा पेज किस पोजीशन पर रैंक कर रहा है। हमारे वेबसाइट में कोई error है या नहीं। इन सब चीजों का रिकॉर्ड Google Search Console में होता है।

दोस्तों कैसी लगी आपको Technical SEO Kya Hai यह जानकारी। उम्मीद करता हूँ आपको यह जानकारी बेहद पसंद आयो होगी। और अगर आप Technical SEO के बारे में कुछ और जानकरी जानते हो तो हमें कमेंट करके जरूर बताइये।

Akash

में पिछले २ सालो से Search Engine Optimization (SEO) का जॉब कर रहा हूँ। और साथ ही में पार्ट टाइम WordPress Development और ब्लॉग्गिंग भी करता हूँ।

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